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बस्ती विकास प्राधिकरण बना भ्रष्टाचार का अखाड़ा: मुख्यमंत्री दरबार तक पहुंचा रसूखदार बाबू की मनमानी का मामला।

चन्द्रेश प्रताप सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। साथ ही, आरोपी कर्मचारी को तत्काल प्रभाव से वर्तमान जिम्मेदारी से हटाकर अन्यत्र संलग्न करने और सख्त विभागीय कार्रवाई की गुहार लगाई गई है।

अजीत मिश्रा (खोजी)

भ्रष्टाचार का अड्डा बना बस्ती विकास प्राधिकरण: मुख्यमंत्री दरबार तक पहुंचा रसूखदार बाबू का मामला

  • रजिस्ट्रेशन और नक्शा पास कराने के नाम पर वसूली: डुमरिया निवासी चन्द्रेश प्रताप सिंह ने सीएम योगी को भेजा गंभीर शिकायत पत्र।
  • कार्यालय से गायब रहने और दलाली का आरोप: तैनात कर्मचारी विपिन कुमार चौबे पर ठेकेदारों के शोषण और अभद्र भाषा के इस्तेमाल का दावा।
  • रसूख की आड़ में अवैध निर्माण को बढ़ावा: अधिकारियों की कथित मिलीभगत से सरकारी राजस्व को पहुंचाया जा रहा है भारी नुकसान।
  • उच्च स्तरीय जांच और सख्त कार्रवाई की मांग: आरोपी कर्मचारी को वर्तमान जिम्मेदारी से हटाने और महकमे को दुरुस्त करने की गुहार।

बस्ती: विकास के नाम पर शहरवासियों को सहूलियत देने के लिए बने विकास प्राधिकरण (Basti Development Authority) इन दिनों खुद भ्रष्टाचार और मनमानी की दीमक का शिकार हो चुके हैं। ताजा मामला जिले के डुमरिया निवासी चन्द्रेश प्रताप सिंह द्वारा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेजे गए एक गंभीर शिकायत पत्र से सामने आया है, जिसने महकमे की कार्यप्रणाली पर गहरे सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।

​शिकायत के केंद्र में हैं बस्ती विकास प्राधिकरण में तैनात विपिन कुमार चौबे, जिनपर पद के दुरुपयोग, अवैध वसूली और दलाली के बेताज बादशाह होने के गंभीर आरोप लगे हैं।

​सुस्त बाबू, सक्रिय दलाल: क्या यही है “भ्रष्टाचार मुक्त” शासन?

​आरोप है कि प्राधिकरण में भवन निर्माण के रजिस्ट्रेशन, नक्शा (प्लान) पास कराने और अन्य अनिवार्य कार्यों के नाम पर ठेकेदारों और आम नागरिकों का जमकर शोषण किया जा रहा है। स्थिति यह है कि ‘सुविधा शुल्क’ (रिश्वत) की अदायगी के बिना पत्रावलियां एक इंच भी आगे नहीं बढ़तीं।

​हैरानी की बात तो यह है कि संबंधित कर्मचारी अपनी मूल कुर्सी पर बैठने के बजाय ज्यादातर समय दलाली और अवैध वसूली के नेटवर्क को संचालित करने में व्यस्त रहते हैं। दफ्तर में फरियादियों के साथ अभद्र भाषा का प्रयोग करना इनकी कार्यशैली का हिस्सा बन चुका है।

​रसूख का खौफ और सरकारी राजस्व को पलीता

​आरोप है कि विपिन कुमार चौबे खुद को कथित तौर पर रसूखदार लोगों का बेहद करीबी बताकर अधिकारियों और आम जनता पर मानसिक दबाव बनाते हैं। इस संरक्षण के बूते ही शहर में धड़ल्ले से अवैध निर्माणों को बढ़ावा दिया जा रहा है।

​इस मिलीभगत का सीधा असर दो मोर्चों पर पड़ रहा है:

  1. विभाग की छवि: आम जनता के बीच विकास प्राधिकरण की साख पूरी तरह धूमिल हो चुकी है।
  2. राजस्व को चपत: अवैध निर्माणों और सांठगांठ के खेल के चलते सरकारी खजाने (राजस्व) को भारी वित्तीय नुकसान पहुंचाया जा रहा है।

​सख्त कार्रवाई की दरकार

​चन्द्रेश प्रताप सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। साथ ही, आरोपी कर्मचारी को तत्काल प्रभाव से वर्तमान जिम्मेदारी से हटाकर अन्यत्र संलग्न करने और सख्त विभागीय कार्रवाई की गुहार लगाई गई है।

सवाल बड़ा है: क्या ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति का दावा करने वाली सरकार इस रसूखदार बाबू के नेटवर्क को नेस्तनाबूद कर पाएगी, या फिर महकमे की फाइलें इसी तरह भ्रष्टाचार की धूल में दबकर दम तोड़ती रहेंगी? बस्ती की जनता और पीड़ित ठेकेदार अब मुख्यमंत्री के अगले कदम का इंतजार कर रहे हैं।

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